जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।
जोरि पानि बोले बचन ह्दयँ न प्रेमु अमात।।284।।1
बालकाण्ड
Bala Kanda
The childhood of Lord Ram: Tulsidas's invocations, the story of Shiva and Parvati, Ram's birth, education, and marriage to Sita.
770 verses
Explore illustrated passages (716)
Choose sections
Passage 31 of 39 · Verses 601–620 of 770
जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानु।।
जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी।।
बिनय सील करुना गुन सागर। जयति बचन रचना अति नागर।।
सेवक सुखद सुभग सब अंगा। जय सरीर छबि कोटि अनंगा।।
करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।।
अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता।।
कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।।
अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल।
हरषे पुर नर नारि सब मिटी मोहमय सूल।।285।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
अति गहगहे बाजने बाजे। सबहिं मनोहर मंगल साजे।।
जूथ जूथ मिलि सुमुख सुनयनीं। करहिं गान कल कोकिलबयनी।।
सुखु बिदेह कर बरनि न जाई। जन्मदरिद्र मनहुँ निधि पाई।।
गत त्रास भइ सीय सुखारी। जनु बिधु उदयँ चकोरकुमारी।।
जनक कीन्ह कौसिकहि प्रनामा। प्रभु प्रसाद धनु भंजेउ रामा।।
मोहि कृतकृत्य कीन्ह दुहुँ भाईं। अब जो उचित सो कहिअ गोसाई।।
कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना। रहा बिबाहु चाप आधीना।।
टूटतहीं धनु भयउ बिबाहू। सुर नर नाग बिदित सब काहु।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।
बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु।।286।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
दूत अवधपुर पठवहु जाई। आनहिं नृप दसरथहि बोलाई।।
मुदित राउ कहि भलेहिं कृपाला। पठए दूत बोलि तेहि काला।।
बहुरि महाजन सकल बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिर नाए।।
हाट बाट मंदिर सुरबासा। नगरु सँवारहु चारिहुँ पासा।।
हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।।
रचहु बिचित्र बितान बनाई। सिर धरि बचन चले सचु पाई।।
पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।।
बिधिहि बंदि तिन्ह कीन्ह अरंभा। बिरचे कनक कदलि के खंभा।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
हरित मनिन्ह के पत्र फल पदुमराग के फूल।
रचना देखि बिचित्र अति मनु बिरंचि कर भूल।।287।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
बेनि हरित मनिमय सब कीन्हे। सरल सपरब परहिं नहिं चीन्हे।।
कनक कलित अहिबेल बनाई। लखि नहि परइ सपरन सुहाई।।
तेहि के रचि पचि बंध बनाए। बिच बिच मुकता दाम सुहाए।।
मानिक मरकत कुलिस पिरोजा। चीरि कोरि पचि रचे सरोजा।।
किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।
सुर प्रतिमा खंभन गढ़ी काढ़ी। मंगल द्रब्य लिएँ सब ठाढ़ी।।
चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।
हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि।।288।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
रचे रुचिर बर बंदनिबारे। मनहुँ मनोभवँ फंद सँवारे।।
मंगल कलस अनेक बनाए। ध्वज पताक पट चमर सुहाए।।
दीप मनोहर मनिमय नाना। जाइ न बरनि बिचित्र बिताना।।
जेहिं मंडप दुलहिनि बैदेही। सो बरनै असि मति कबि केही।।
दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।।
जनक भवन कै सौभा जैसी। गृह गृह प्रति पुर देखिअ तैसी।।
जेहिं तेरहुति तेहि समय निहारी। तेहि लघु लगहिं भुवन दस चारी।।
जो संपदा नीच गृह सोहा। सो बिलोकि सुरनायक मोहा।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।।
तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु।।289।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
पहुँचे दूत राम पुर पावन। हरषे नगर बिलोकि सुहावन।।
भूप द्वार तिन्ह खबरि जनाई। दसरथ नृप सुनि लिए बोलाई।।
करि प्रनामु तिन्ह पाती दीन्ही। मुदित महीप आपु उठि लीन्ही।।
बारि बिलोचन बाचत पाँती। पुलक गात आई भरि छाती।।
रामु लखनु उर कर बर चीठी। रहि गए कहत न खाटी मीठी।।
पुनि धरि धीर पत्रिका बाँची। हरषी सभा बात सुनि साँची।।
खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।।
पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस।
सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस।।290।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।।
प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।।
तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।।
भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।।
स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।।
पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।।
जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई।।
कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसकाने।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ।
रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
पूछन जोगु न तनय तुम्हारे। पुरुषसिंघ तिहु पुर उजिआरे।।
जिन्ह के जस प्रताप कें आगे। ससि मलीन रबि सीतल लागे।।
तिन्ह कहँ कहिअ नाथ किमि चीन्हे। देखिअ रबि कि दीप कर लीन्हे।।
सीय स्वयंबर भूप अनेका। समिटे सुभट एक तें एका।।
संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।।
तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी।।
सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।।
जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा। सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल।
भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल।।292।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।।
देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।।
राजन रामु अतुलबल जैसें। तेज निधान लखनु पुनि तैसें।।
कंपहि भूप बिलोकत जाकें। जिमि गज हरि किसोर के ताकें।।
देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।।
दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।।
सभा समेत राउ अनुरागे। दूतन्ह देन निछावरि लागे।।
कहि अनीति ते मूदहिं काना। धरमु बिचारि सबहिं सुख माना।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
Illustrations
तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ।
कथा सुनाई गुरहि सब सादर दूत बोलाइ।।293।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।।
जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।
तुम्ह गुर बिप्र धेनु सुर सेबी। तसि पुनीत कौसल्या देबी।।
सुकृती तुम्ह समान जग माहीं। भयउ न है कोउ होनेउ नाहीं।।
तुम्ह ते अधिक पुन्य बड़ काकें। राजन राम सरिस सुत जाकें।।
बीर बिनीत धरम ब्रत धारी। गुन सागर बर बालक चारी।।
तुम्ह कहुँ सर्ब काल कल्याना। सजहु बरात बजाइ निसाना।।