चले बान सपच्छ जनु उरगा। प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा।।
रथ बिभंजि हति केतु पताका। गर्जा अति अंतर बल थाका।।
तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना। अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना।।
बिफल होहिं सब उद्यम ताके। जिमि परद्रोह निरत मनसा के।।
तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा।।
तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक।।
रावन सिर सरोज बनचारी। चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।।
दस दस बान भाल दस मारे। निसरि गए चले रुधिर पनारे।।
स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना।।
तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे।।
काटतहीं पुनि भए नबीने। राम बहोरि भुजा सिर छीने।।
प्रभु बहु बार बाहु सिर हए। कटत झटिति पुनि नूतन भए।।
पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा। अति कौतुकी कोसलाधीसा।।
रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू। मानहुँ अमित केतु अरु राहू।।6
लंकाकाण्ड
Lanka Kanda
The great battle between Ram's army and Ravana, and the victory of dharma.
273 verses
Choose sections
Passage 11 of 14 · Verses 201–220 of 273
जनु राहु केतु अनेक नभ पथ स्त्रवत सोनित धावहीं।
रघुबीर तीर प्रचंड लागहिं भूमि गिरन न पावहीं।।
एक एक सर सिर निकर छेदे नभ उड़त इमि सोहहीं।
जनु कोपि दिनकर कर निकर जहँ तहँ बिधुंतुद पोहहीं।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
जिमि जिमि प्रभु हर तासु सिर तिमि तिमि होहिं अपार।
सेवत बिषय बिबर्ध जिमि नित नित नूतन मार।।92।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस गाढ़ी।।
गर्जेउ मूढ़ महा अभिमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।
समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो।।
दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ।।
हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा।।
सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिस गगन महि पाटे।।
काटे सिर नभ मारग धावहिं। जय जय धुनि करि भय उपजावहिं।।
कहँ लछिमन सुग्रीव कपीसा। कहँ रघुबीर कोसलाधीसा।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
कहँ रामु कहि सिर निकर धाए देखि मर्कट भजि चले।
संधानि धनु रघुबंसमनि हँसि सरन्हि सिर बेधे भले।।
सिर मालिका कर कालिका गहि बृंद बृंदन्हि बहु मिलीं।
करि रुधिर सरि मज्जनु मनहुँ संग्राम बट पूजन चलीं।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
पुनि दसकंठ क्रुद्ध होइ छाँड़ी सक्ति प्रचंड।
चली बिभीषन सन्मुख मनहुँ काल कर दंड।।93।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।।
तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।।
लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।।
देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।।
रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।।
सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।।
तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।।
राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
उर माझ गदा प्रहार घोर कठोर लागत महि पर् यो।
दस बदन सोनित स्त्रवत पुनि संभारि धायो रिस भर् यो।।
द्वौ भिरे अतिबल मल्लजुद्ध बिरुद्ध एकु एकहि हनै।
रघुबीर बल दर्पित बिभीषनु घालि नहिं ता कहुँ गनै।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
उमा बिभीषनु रावनहि सन्मुख चितव कि काउ।
सो अब भिरत काल ज्यों श्रीरघुबीर प्रभाउ।।94।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी।।
रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता।।
ठाढ़ रहा अति कंपित गाता। गयउ बिभीषनु जहँ जनत्राता।।
पुनि रावन कपि हतेउ पचारी। चलेउ गगन कपि पूँछ पसारी।।
गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना।।
लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा।।
सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।
बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
संभारि श्रीरघुबीर धीर पचारि कपि रावनु हन्यो।
महि परत पुनि उठि लरत देवन्ह जुगल कहुँ जय जय भन्यो।।
हनुमंत संकट देखि मर्कट भालु क्रोधातुर चले।
रन मत्त रावन सकल सुभट प्रचंड भुज बल दलमले।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
तब रघुबीर पचारे धाए कीस प्रचंड।
कपि बल प्रबल देखि तेहिं कीन्ह प्रगट पाषंड।।95।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।
रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।
देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा।।
भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा।।
दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।
डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।
सब सुर जिते एक दसकंधर। अब बहु भए तकहु गिरि कंदर।।
रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी। जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
जाना प्रताप ते रहे निर्भय कपिन्ह रिपु माने फुरे।
चले बिचलि मर्कट भालु सकल कृपाल पाहि भयातुरे।।
हनुमंत अंगद नील नल अतिबल लरत रन बाँकुरे।
मर्दहिं दसानन कोटि कोटिन्ह कपट भू भट अंकुरे।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
सुर बानर देखे बिकल हँस्यो कोसलाधीस।
सजि सारंग एक सर हते सकल दससीस।।96।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी।।
रावनु एकु देखि सुर हरषे। फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे।।
भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।
प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।
अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।
सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।
हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे।।
देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
गहि भूमि पार् यो लात मार् यो बालिसुत प्रभु पहिं गयो।
संभारि उठि दसकंठ घोर कठोर रव गर्जत भयो।।
करि दाप चाप चढ़ाइ दस संधानि सर बहु बरषई।
किए सकल भट घायल भयाकुल देखि निज बल हरषई।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
तब रघुपति रावन के सीस भुजा सर चाप।
काटे बहुत बढ़े पुनि जिमि तीरथ कर पाप। 97।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी।।
मरत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा। धाए कोपि भालु भट कीसा।।
बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।
बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।
एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भअगि चलहिं एक लातन्ह मारी।।
तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ।।
रुधिर देखि बिषाद उर भारी। तिन्हहि धरन कहुँ भुजा पसारी।।
गहे न जाहिं करन्हि पर फिरहीं। जनु जुग मधुप कमल बन चरहीं।।
कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।
पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।
हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर।।
मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।
संग भालु भूधर तरु धारी। मारन लगे पचारि पचारी।।
भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना। गहि पद महि पटकइ भट नाना।।
देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।Transliteration
Metered English
In plain words
What it means
Commentary & notes
उर लात घात प्रचंड लागत बिकल रथ ते महि परा।
गहि भालु बीसहुँ कर मनहुँ कमलन्हि बसे निसि मधुकरा।।
मुरुछित बिलोकि बहोरि पद हति भालुपति प्रभु पहिं गयौ।
निसि जानि स्यंदन घालि तेहि तब सूत जतनु करत भयो।।