राम

तत्सुखिया लीला

The Līlā of Joy in the Beloved's Happiness

Chapter 19 of 32Source scan pages 213–2288 paired passages

Original

Sanskrit invocation

॥ विजयेतां श्रीप्रियाप्रियतमौ ॥

English translation

May Śrī Priyā and Her most beloved Lord be ever victorious.

Original

तत्सुखिया लीला

यमुना-पुलिनके उपवनमें श्यामसुन्दरकी प्रतीक्षामें श्रीप्रिया बैठी हैं। रात तीन घड़ीसे अधिक बीत चुकी है। उपवन यमुनाजीके मोड़पर है; एक छोटी शाखा उसे घेरकर पुनः यमुनामें मिलती है और उसके दोनों छोरों तथा बीचमें सुन्दर पुल हैं, जिनसे व्रजसुन्दरियाँ संकेत-स्थलपर आती हैं। शाखाके उद्गमपर सौ-सौ गजकी सजी वेदी है, नीली कालीन तथा खंभोंपर पीली रेशमी चाँदनी है। जरीसे राधा-कृष्णकी लीलाओंके चित्र और मणियोंका प्रकाश ऐसा लगता है मानो पीले आकाशमें लीलाएँ चल रही हों।

पूर्वोत्तर किनारेके वटवृक्षके नीचे नीले मखमलके आसनपर रानी दक्षिणाभिमुख बैठी हैं। कृष्णपक्षकी तृतीयाका चन्द्र उदित है। बाँयी ओर विशाखा और आगे ललिता उस पथको देख रही हैं जिससे श्यामसुन्दर आते हैं। चम्पई साड़ी पहने रानी बार-बार उठती-बैठती पूछती हैं, “ललिते! प्रभात होनेमें कितनी देर है?”

ललिता कहती हैं, “अभी तीन घड़ी ही बीती है।” रानी कहती हैं कि चन्द्र अस्त होने जा रहा है। ललिता गले लगाकर स्वेद पोंछती हैं और समझाती हैं कि विरहसे दिग्भ्रम हुआ है; चन्द्र अभी उदित हुआ है। रूप श्यामसुन्दरको लेकर आती ही होगी।

English translation

The Līlā of Living for the Beloved's Joy

Rādhā waits for Śyāmasundara in a jeweled pavilion beside a branch of the Yamunā. Though only three watches have passed, separation makes Her believe dawn is near. Lalitā embraces Her and explains that the moon has only just risen and that Rūpa will soon bring Him.

Original

रानी ललिताकी गोदमें सिर रखती हैं। वृन्दा कानमें कुछ कहती हैं तो ललिता क्रोधसे विमलामञ्जरीको आज्ञा देती हैं कि रति और धन्यासे कहो, श्यामसुन्दर आवें तो आने न दें। रानी उठकर करुण स्वरमें रोकती हैं। ललिता कहती हैं, “आज उन्हें दिखा दूँगी कि ललिता क्या है।”

राधा कहती हैं, “ऐसा मत कर, इससे मुझे बहुत दुःख होगा।” ललिताका क्रोध शान्त होता है, पर वह कहती हैं कि राधा ही सब खेल बिगाड़ देती हैं; श्यामसुन्दर शैव्याके कुञ्जके चक्कर लगा रहे हैं।

राधा आँसू रोककर कहती हैं, “मेरे प्रियतम मेरे दास नहीं, मैं उनकी दासी हूँ। रसके समुद्र, सुखके सागर, मेरे जीवन-सर्वस्वका अपनी दासी राधापर पूर्ण अधिकार है। हृदयसे लगायें अथवा चरणोंसे ठुकरा दें, दोनों अवस्थाओंमें यह दासी उन्हींकी है।”

फिर कहती हैं, “यदि उन्हें बहिन चन्द्रावलीके कुञ्जमें सुख मिलता है तो विधाता उनके हृदयमें मेरी स्मृति ढक दें, जिससे मेरे स्मरणसे उनके सुखमें विघ्न न हो।”

English translation

Learning that He has gone near Śaivyā's bower, Lalitā angrily orders the guards to bar Him. Rādhā stops her and reveals Her heart: Śyāmasundara is not Her servant; She is eternally His, whether embraced or rejected. If He finds joy with Candrāvalī, She prays that even Her memory be hidden from Him so it cannot disturb that joy.

Original

विशाखा पूछती हैं, “यदि वे तुम्हारे पास आना बंद कर दें, तुम्हारे सामने चन्द्रावलीके गलेमें बाँह डालकर उसके कुञ्जमें चले जायें तो धैर्य रख सकोगी?” राधा कहती हैं, “सर्वथा दुःख नहीं होगा; आनन्दातिरेकसे मूर्छित हो सकती हूँ। मैं जिसे देखती हूँ, सोचती हूँ कि इसे सजाकर श्यामसुन्दरके चरणोंमें बैठाऊँ तो उन्हें कितना सुख मिलेगा। चन्द्रावलीको देखकर भी यही भाव आता है।

“पर यह होगा नहीं। मैं उनके हृदयको जानती हूँ। प्रेमका असीम सागर उफनता है; उसमें डूबकर देखती हूँ तो अणु-अणुमें मैं ही बैठी हूँ।” भावाविष्ट होकर वे कहती हैं, “मेरे जीवन-सर्वस्व! चन्द्रावलीके साथ इसी उपवनके पुष्प निहारो। तुम्हें उसके साथ देखकर उससे भी अनन्तगुना सुख मिलेगा जितना तुम्हारे आलिङ्गनसे मिलता है।”

वे कहती हैं कि श्यामसुन्दरकी प्रत्येक नवीन शोभा देखकर आँखें वहीं चिपक जाती हैं। यदि उन्हें दुःख पहुँचाकर सुख मिले तो वे अनन्तकाल उन्हें दुःख देते रहें, क्योंकि उनका सुख ही राधाका सुख है।

English translation

Viśākhā tests Her: could She endure seeing Him embrace Candrāvalī and leave with her? Rādhā says She might faint, but only from excess joy. Every beautiful sakhī makes Her wish to adorn and offer her for His happiness. Yet She knows His heart is an ocean whose every particle contains Rādhā alone. Even if causing Her pain gave Him joy, She would gladly receive it forever.

Original

रानी तीन दिन पहलेका रहस्य सुनाती हैं। सूर्यमन्दिरमें श्यामसुन्दर सूखे मुखसे आये और बोले कि वनमें एक सुन्दर किशोरी मिली जिसने उन्हें फटकारा, “मैं राधा नहीं कि तेरे जालमें फँस जाऊँ।” राधाको क्रोध इस बातपर आया कि उसने उनके कोमल हृदयको ठेस पहुँचायी। वे उसे प्रसन्न करके उनके पास लाने चलीं।

वृक्षके पास बैठी सुन्दरीने पहले भय और अविश्वास दिखाया। राधाने कहा कि श्यामसुन्दर उससे प्रेम करते हैं। उसने पूछा कि क्या राधाको ईर्ष्या न होगी। राधाने उसके हाथ पकड़कर शपथ दी, “तुझे पाकर वे प्रसन्न हों तो इससे बढ़कर सुख नहीं। मेरी अपनी कोई कुञ्ज नहीं; आठों सखियोंकी कुञ्ज तुम्हारी है। मैं तुम्हारी दासी होकर जैसा कहोगी वैसा करूँगी।” अन्ततः वह साथ चली।

English translation

Rādhā recounts a secret test from three days earlier. Śyāmasundara described a beautiful cowherd girl who rebuffed Him. Rādhā's only anger was that the girl had hurt His tender heart. She found her, swore that no jealousy could arise, offered every bower and Her own service, and persuaded her to meet Him.

Original

राधा उसे श्यामसुन्दरके पास लाकर कहती हैं, “मेरी बड़ी बहिन आयी है, इसे कोई कष्ट न हो।” वह मूर्छित होकर गिरती है। राधा जलके छींटे देती हैं तो रंग उतरता है और वह चित्रा निकलती है। चित्रा कहती हैं, “आज मैंने तेरा हृदय देखा और जाना कि श्यामसुन्दरके प्रति प्रेम क्या है।”

श्यामसुन्दर राधाको लगाकर कहते हैं, “मेरे हृदयकी रानी! मैं तुम्हारा बिना मोलका दास हूँ। तुम्हारे त्यागके समान मेरे पास कुछ नहीं जिससे प्रेमका ऋण चुकाऊँ।” चित्राने उनकी आज्ञा और राधाकी सौगन्धसे वेश बनाया था। राधा समझ गयीं कि यह प्रियतमकी लीला थी और वे उन्हें कितना प्रेम करते हैं।

English translation

The girl faints. Water washes away her coloring and reveals Citrā, disguised by Śyāmasundara to test Rādhā's heart. Citrā says she has now understood true love. Śyāmasundara embraces Rādhā and declares Himself Her unpurchased servant, unable to repay Her sacrifice.

Original

पुनः भावाविष्ट राधा कल्पना करती हैं कि शैव्या चन्द्रावलीका पत्र देने आयी है। वे कहती हैं, “मैं चन्द्रावलीकी दासी हूँ,” और उसके कुञ्जकी ओर दौड़ती हैं। पकड़ी जानेपर भी पुकारती हैं, “चन्द्रावलीसे कह कि राधा तुम्हारी दासी आयी है। झाड़ूँगी, नहलाऊँगी, फूलोंके गहने बनाकर श्यामसुन्दरके पास बैठाऊँगी और पंखा झलूँगी। मैं उनके योग्य नहीं; मेरे प्रेमसे उनका विवेक खोया है। आज उन्हें सच्चा सुख मिलेगा।”

तभी घाटपर छिपे श्यामसुन्दर आकर उन्हें हृदयसे लगा लेते हैं। वे कहते हैं, “आज पहले ही आकर तुम्हारे मुखसे हृदयकी बात सुनने छिपा था। तुम्हारा हृदय सर्वथा श्याममय है। दासी तुम नहीं, मैं तुम्हारा बिना मोलका दास हूँ। तुम्हारे प्रेमका एक कण भीखमें दोगी?” श्रीप्रिया उनके मुखको हाथसे दबा देती हैं कि आगे न बोलें।

English translation

In another vision Rādhā runs to serve Candrāvalī, promising to bathe, adorn, and seat her beside Śyāmasundara while She fans Them. Śyāmasundara, who has been hidden nearby listening, emerges and embraces Her. He calls Himself Her unpurchased servant and begs for one particle of Her love. She covers His mouth to stop Him speaking further.

Original

Braj Bhāṣā song

वृन्दा प्रिया-प्रियतमको सिंहासनपर बैठाती हैं। ललिता उजला शर्बत देती हैं। श्रीप्रिया पहले एक घूँट पीती हैं, फिर श्यामसुन्दर। मधुमतीमञ्जरी वीणा लेकर गाती है:

बसौ मेरे नैननमें दोऊ चन्द।

गौर बरन वृषभानु-नन्दिनी, श्याम बरन नन्द-नन्द॥

गोचक रहे लुभाय रूपमें, निरखत आनन्दकन्द।

है श्रीभट्ट प्रेम-रस इन्धन, क्यों हटे हिय फन्द॥

English translation

Vṛndā seats Them upon a throne, and They share white sherbet. Madhumatī sings:

May both moons dwell within my eyes,

the fair daughter of Vṛṣabhānu and the dark son of Nanda.

Hidden within enchanting beauty, the root of bliss gazes on.

Śrī Bhaṭṭa says love's rasa feeds the flame, so how could the heart's bond loosen?