राम

शृङ्गार लीला

The Adornment Līlā

Chapter 17 of 32Source scan pages 194–1987 paired passages

Original

Sanskrit invocation

॥ विजयेतां श्रीप्रियाप्रियतमौ ॥

English translation

May Śrī Priyā and Her most beloved Lord be ever victorious.

Original

शृङ्गार लीला

श्रीप्रिया-प्रियतम श्रीविशाखाके कुञ्जमें कदम्बकी छायामें विराजमान हैं। कदम्बके चारों ओर फूल खिले हैं और भौंरे गुञ्जार कर रहे हैं। वृक्षके नीचेका आलवाल भूमिसे डेढ़ हाथ ऊँचा है। उसके चारों ओर आठ-आठ हाथतक संगमरमर लगा है, फिर बेला-पुष्प और मल्लिकाकी गोलाकार क्यारियाँ तथा हरी दूब है। स्थान-स्थानपर स्थल-कमल एवं सुगन्धित फूलोंकी छोटी झाड़ियाँ हैं।

प्रिया-प्रियतम दक्षिणाभिमुख, पीठ गट्टेके सहारे टिकाये बैठे हैं। श्यामसुन्दरकी बाँयी ओर प्रियाजी हैं। आगे बाँसकी डलियामें बेला और चमेलीके फूल हैं। डलिया केलेके हरे-पीले पत्तोंसे जड़ी और जल-बूँदोंसे चमक रही है। दोनों एक ही धागेके विपरीत छोर पकड़कर फूल पिरोते हुए गजरा बना रहे हैं। कुछ सखियाँ पासकी क्यारियोंसे फूल तोड़कर अञ्चलमें भरतीं और डलियामें उड़ेलती हैं।

शीतल, मन्द, सुगन्धित पवनके रहते भी विमलामञ्जरी खसका पंखा धीरे-धीरे झल रही है। प्रिया-प्रियतमके मुखपर मधुर मुसकान आती है, पर दोनों ऐसा भाव करते हैं मानो एकान्त मनसे फूल पिरो रहे हों। वे कनखियोंसे एक-दूसरेको देखते हैं; आँखें मिलते ही प्रिया लजाकर पुकारती हैं, “ललिते! जल्दी और फूल ला, डलियाके फूल समाप्त हो चले हैं।” श्यामसुन्दर भी कहते हैं, “हाँ-हाँ, अब फूल बहुत कम हैं, शीघ्र ला।”

English translation

The Adornment Līlā

Priyā and Her beloved sit beneath a kadamba in Viśākhā's bower. Marble, circular beds of jasmine, green grass, land-lotuses, and fragrant shrubs surround the raised tree basin.

Facing south, They hold opposite ends of one thread and weave jasmine blossoms into a garland. Sakhīs gather more flowers while Vimalāmañjarī fans Them. Both pretend complete concentration, yet steal sidelong glances. Whenever Their eyes meet, Rādhā bashfully calls for more flowers, and Śyāmasundara playfully agrees that the basket is nearly empty.

Original

दोनों गजरेके छोर बार-बार मिलाकर देखते हैं कि गाँठ देने जितना पिरोया गया या नहीं। अँगुलियाँ छू जानेसे प्रेम उफनता, शरीर काँपते और मुखारविन्द स्वेदकणोंसे भर जाते हैं। गजरा तैयार होनेपर श्रीप्रिया गाँठ देती हैं। श्यामसुन्दर डलियासे फूल छाँटकर पीताम्बरके एक किनारेपर रखते और गजरेके लटकनेवाले गुच्छेका निर्माण करते हैं। कदम्बके पुष्पोंकी मीठी सुगन्ध आ रही है। उनकी वनमालाकी सुगन्धसे भौंरे आते हैं, पर प्रिया रूमालसे उड़ा देती हैं।

श्यामसुन्दर फूल पिरोते हैं और प्रिया चुनकर हाथमें देती हैं। गजरा बनते ही वे प्रियाको पहनाने उठते हैं, पर प्रिया पकड़कर कहती हैं, “नहीं, इसे मैं तुम्हें पहनाऊँगी।”

वे कहते हैं, “नहीं, इसे मैं तुम्हें पहनाऊँगा। प्रतिदिन मेरा शृङ्गार तू पहले करती है, आज मैं तुम्हारा करूँगा।”

सबके सामने उनसे शृङ्गार करानेमें लज्जा होनेसे प्रिया कहती हैं, “नहीं।”

English translation

Each time They bring the ends together to measure the garland, Their fingers touch, love surges, Their bodies tremble, and perspiration covers Their faces. Rādhā ties the finished strand while He fashions its hanging cluster and She passes Him selected flowers.

When He rises to place it on Her, She catches it and insists on adorning Him. He replies that She always decorates Him first, so today He will decorate Her. Before all the sakhīs, She shyly refuses.

Original

ललिता आकर श्रीराधाके बायें कंधेको पकड़ती हैं, “देखो, मैं निर्णय करती हूँ; फिर किसीको आनाकानी नहीं करनी पड़ेगी।” राधा पहले निर्णयका रूप जानना चाहती हैं। श्यामसुन्दर बीचमें कहते हैं, “मैं तो मान लूँगा।” सब आश्चर्य करते हैं। सखियोंके दबावपर राधारानी भी मान जाती हैं।

ललिता दो बड़े बेला-पुष्प उठाकर एककी पंखुड़ीपर ‘राधा’ और दूसरेपर ‘श्याम’ लिखती हैं। दोनोंको अञ्जलिमें रखकर कहती हैं, “आँखें मूँद लो। मैं इन्हें उलटकर रख दूँगी। फिर राधा एक फूल उठाये। जिसका नाम निकले, उसीको आज गजरा पहनाने तथा शृङ्गार करनेका अधिकार होगा।”

दोनों आँखें मूँदते हैं। ललिता फूल उलटती हैं। राधारानी विचारकर संयोगवश ‘श्याम’ लिखा फूल उठाती हैं। श्रीकृष्ण दूसरा फूल उठाकर देखते ही आनन्दसे गजरा श्रीप्रियाके गलेमें डाल देते हैं। सखियाँ ताली बजाती हैं।

English translation

Lalitā proposes a binding decision. On two jasmine petals she writes “Rādhā” and “Śyāma,” turns them face down, and asks Rādhā to choose. The name selected will possess the right to adorn the other. Rādhā happens to choose “Śyāma.” Delighted, Kṛṣṇa places the garland around Her neck while the sakhīs clap.

Original

अब फूलोंका शृङ्गार आरम्भ होता है। श्यामसुन्दर भाँति-भाँतिके फूलोंके गहने बनाकर श्रीप्रियाको सजाते हैं। अन्तमें अत्यन्त सुन्दर चन्द्रिका बनाते और पहलेकी रत्न-मणि-मोती-जटित चन्द्रिका उतारनेको कहते हैं। प्रियाका संकेत पाकर विशाखा अञ्चल हटाकर बन्धन खोलती और उसे उतारती हैं।

श्यामसुन्दर पुष्पोंकी चन्द्रिका बाँधते समय प्रेमावेशसे काँपते हैं। प्रिया मुसकराकर कहती हैं, “खेल मत करो, शीघ्र बाँध दो।” वे कहते हैं, “मैं क्या करूँ? तू सिर हिला रही है, इसीसे बाँध नहीं पा रहा।” प्रिया उसे हाथोंसे पकड़कर कहती हैं, “लो, मैं स्वयं बाँध लेती हूँ।”

वे चन्द्रिका उनके हाथमें देकर सामने पड़ा दर्पण मुखके आगे करते हैं, पर हाथ काँपनेसे दर्पण हिलता है। प्रिया दर्पणमें देखकर चन्द्रिका बाँधना चाहती हैं, पर अपने मुखके स्थानपर श्यामसुन्दरका मुख दीखता है। बड़ी कठिनतासे बाँधते ही मूर्छित होकर उनकी गोदमें गिर पड़ती हैं। श्यामसुन्दर गोदमें लेकर खसके पंखेसे झलते और शरीर सहलाते हैं। मधुमती मञ्जरी वीणाके तार मिलाकर गाती है:

English translation

Śyāmasundara fashions many floral ornaments for Priyā. Last He makes a flower crescent and asks Viśākhā to remove Her jeweled one. His hands tremble too much to fasten the new ornament, so Rādhā takes it Herself.

He holds up a mirror, but both His hand and the reflection tremble. Instead of Her own face, She sees Śyāmasundara's. The moment She secures the crescent, She faints into His lap. He fans and caresses Her while Madhumatī begins to sing.

Original

Braj Bhāṣā song

तू है सजनी बड़भाग भरी, नन्दलाल तेरे घर जावत हैं।

निज कर गूँथि सुमनके गजरे, हरषि तोहि पहरावत हैं॥

तू अपनो शृङ्गार करति जब, दरपन तोहि दिखावत हैं।

आनन्दकन्द चन्द मुख तेरो, निरखि निरखि सुख पावत हैं॥

जाके गुन सब जगत बखानत, सो तेरो गुन गावत हैं।

नारायन बिनु दास आजकल, तेरेहि हाथ बिकावत हैं॥

English translation

Friend, you are filled with the greatest fortune, for Nandalāla comes to your home.

With His own hands He weaves flower garlands and joyfully places them upon you.

As you adorn yourself, He holds the mirror before you.

Gazing again and again upon your moonlike face, the root of bliss finds happiness.

He whose virtues all the world proclaims now sings of your virtues.

Nārāyaṇa says: the independent Lord has lately sold Himself into your hands.

Original

श्रीप्रियाकी मूर्छा टूटती है और वे अपनेको श्यामसुन्दरकी गोदमें पाती हैं। लज्जासे घबराकर शीघ्र उठतीं और अञ्चल सँभालती हैं। श्यामसुन्दर तथा सखियाँ हँसते हैं। अब श्यामसुन्दरके शृङ्गारकी बारी आती है। सभी सखियाँ आनन्दमें भाँति-भाँतिके आभूषण बनाकर राधारानीके हाथोंमें देती जाती हैं। श्रीराधारानी श्यामसुन्दरको सजा रही हैं।

English translation

Priyā revives in Śyāmasundara's lap. Embarrassed, She quickly rises and adjusts Her veil as He and the sakhīs laugh. Now it is His turn. The joyful sakhīs fashion many ornaments and place them in Rādhā's hands as She adorns Śyāmasundara.